आशा की सीख

इक इक मोती संभाल कर जोड़े थे ज़िन्दगी के पल मैंने,क्या खबर थी तूफ़ान के आने से भिखर जाएंगे सब तूफ़ान को रोकना तो बस में न था मेरे,उलझी तूफ़ान से, फिर हार मानी यूँही थकी बैठी थी एक पुराने दरख्त की छांव में,एक नन्ही परी ने जब मेरे सर पर हाथ फेरा समझाया बहुत प्यार से, आँखों में जो आंसूं थे उन्हें पोछाजीवन रुकता नहीं कभी किसी तूफ़ान के आजाने से – बोली वहहार मान के रुकना नहीं कहलाती ज़िन्दगीउठो अंजलि, उठ चल अपनी राह पे,कई तूफ़ान आने हैं अभी,इन्हे पीछे छोड़ आगे बढ़ना है तुझे अभी हौसला मिला परी की बातों से, चल पड़ी … Continue reading आशा की सीख